लोकतांत्रिक देश में क्या न्यायपालिका से प्रश्न करना वर्जित है?
प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुड़ी, कुलपति, जेएनयू एनबीडी दिल्ली, “लोकतंत्र तब फलता-फूलता है जब इसकी संस्थाओं को हमेशा जांच और पारदर्शिता के दायरे में लाया जाता है।” लोकतंत्र वाद-संवाद पर आधारित होता है। राज्य की संस्थाएँ लोकतंत्र की नींव हैं। लेकिन वर्तमान समय में न्यायपालिका संवाद और विचार विमर्श पर कम, अपनी खुद की प्रतिध्वनि के रूप…
