श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ द्वारा मेधावी विद्यार्थियों का भव्य सम्मान समारोह संपन्न

मुंबई। धार्मिक शिक्षा, संस्कार एवं श्रुतज्ञान के संवर्धन हेतु कार्यरत श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ द्वारा आयोजित धार्मिक परीक्षा–2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों के सम्मानार्थ एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह गौरवपूर्ण कार्यक्रम पूज्यश्री कलापूर्णसूरीश्वरजी महाराज के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय कल्पतरुसूरीश्वरजी महाराज की पावन निश्रा तथा चतुर्विध संघ की विशाल उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और धर्मभावना से ओतप्रोत रहा। समारोह में धार्मिक परीक्षा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त की गईं। इस अवसर पर संघ के उपाध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि, पाठशाला बच्चों को संस्कार एवं मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करने का प्रथम और सर्वोत्तम केंद्र है। श्रुतज्ञान की वास्तविक विरासत पाठशाला से ही प्राप्त होती है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में पाठशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, जहां सम्यक ज्ञान के माध्यम से आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। पाठशालाओं में अध्ययन करने वाले विद्यार्थी भविष्य में जैन शासन के सशक्त रक्षक बनते हैं। यही बालक और बालिकाएं आगे चलकर साधु-साध्वी, सुश्रावक, सुश्राविका, जैन ट्रस्टी, स्वयंसेवक तथा समाज के जागरूक नेतृत्वकर्ता बनेंगे।
संघ के ट्रस्टी अशोक नरसी चरला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, वर्तमान डिजिटल युग में बच्चों को पाठशालाओं से जोड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है। समय की आवश्यकता के अनुरूप पाठशालाओं का आधुनिकीकरण कर नई पीढ़ी को अधिक आकर्षक एवं प्रभावी धार्मिक शिक्षा प्रदान करना आवश्यक है।
ट्रस्टी सुरेश देवचंद संघवी ने कहा कि, श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ का मुख्य उद्देश्य बच्चों में धार्मिक एवं नैतिक संस्कारों का रोपण करना है। इन संस्कारों की शुरुआत का पहला सोपान पाठशाला ही है। वास्तव में जैन शासन का प्राण पाठशालाएं ही हैं।
महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह ने कहा कि, जैन धर्म के शाश्वत सिद्धांतों एवं जीवन मूल्यों का प्रसार पाठशालाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने तथा बच्चों एवं युवाओं में धार्मिक संस्कारों का सिंचन करने का महत्वपूर्ण कार्य संघ निरंतर कर रहा है।
संघ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 में आयोजित राष्ट्रव्यापी धार्मिक परीक्षा में 25,000 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें अनेक विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। वर्तमान में संस्था देशभर में 655 से अधिक पाठशालाओं का मार्गदर्शन कर रही है, जहां 75,000 से अधिक विद्यार्थी धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही 1,500 से अधिक पंडितवर एवं शिक्षिका बहनें निःस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
यह उपलब्धि केवल गर्व का विषय ही नहीं, बल्कि समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक सशक्त आधार भी है। जैन पाठशालाएं आज भी उसी पवित्र दायित्व का निर्वहन कर रही हैं, जिसकी परंपरा तीर्थंकर भगवंतों और आचार्य भगवंतों ने मानव कल्याण के लिए स्थापित की थी – धर्म के दिव्य प्रकाश से आत्मा और समाज को आलोकित करने का कार्य।
कार्यक्रम में ट्रस्टी सुरेश देवचंद संघवी, उपाध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह, ट्रस्टी अशोक नरसी चरला, मंत्री विमलेशभाई झवेरी, कमलेशभाई महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह, महिला विभाग की सदस्याएं तथा मैनेजिंग कमेटी के सदस्य जयंतीलाल शाह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त विलेपार्ले श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन देहरासर पेढ़ी के अध्यक्ष प्रवीणभाई जैन, मंत्री राजूभाई शाह, प्रबंधन समिति के सदस्य, पंडितवर, शिक्षिका बहनें, विद्यार्थी एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर विलेपार्ले जैन संघ के ट्रस्टियों एवं पाठशाला के ज्ञानदाताओं का भी विशेष सम्मान किया गया।
संपूर्ण कार्यक्रम भक्ति, उत्साह एवं जैन शासन प्रभावना के वातावरण में सम्पन्न हुआ। अंत में संस्था के पदाधिकारियों ने दानदाताओं, पंडितवरों, शिक्षकों, शिक्षिका बहनों, कार्यकर्ताओं, अभिभावकों तथा उपस्थित सभी महानुभावों के सहयोग एवं सहभागिता के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

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