हम जश्न मनाते आजादी का, वो जान लुटाते हैं
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार एनबीडी मुंबई, वो सीमा के दीपक थे, सरहद की रक्षा खातिर,मिट गए, फिर भी चेहरे पर शिकन तक ना दिखी।घर भी था, आँगन भी था, माँ की ममता साथ थी,फिर भी तिरंगे के आगे हर खुशी बिसरा गए। कभी बिटिया की हँसी याद, कभी माँ की आँखें,कभी पत्नी…
