संस्कृत विद्यालय के संस्थापक व्याकरणाचार्य पंडित राज नारायण मिश्र का निधन

जौनपुर। जनपद के महराजगंज थाना क्षेत्र के कोल ग्रामसभा निवासी एवं श्री उमा महेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के संस्थापक व पूर्व प्रधानाचार्य, महान विद्वान व्याकरणाचार्य पं. राज नारायण मिश्र का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।उनके पुत्र डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने बताया कि पं. राज नारायण मिश्र का वाराणसी स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हुआ। वह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से क्षेत्र ने शिक्षा और संस्कृत के क्षेत्र में अपना एक बड़ा विद्वान खो दिया है।
पं. राज नारायण मिश्र ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने मिर्जापुर में संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य पद पर कार्य किया, लेकिन क्षेत्र के विकास और ग्रामीण अंचल में बेहतर संस्कृत शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गांव लौट आए। इसके बाद उन्होंने श्री उमा महेश्वर संस्कृत विद्यालय की नींव रखी।विद्यालय की स्थापना के बाद उन्होंने उसके विकास, मान्यता दिलाने तथा पठन-पाठन की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए दिन-रात अथक प्रयास किया। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण ऐसा था कि 95 वर्ष की उम्र में भी वह छात्रों को व्याकरण के गुण और संस्कृत शिक्षा की बारीकियां सिखाते रहे।उनके निधन को क्षेत्र के लोगों ने शिक्षा और संस्कृत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। लोगों का कहना है कि पं. राज नारायण मिश्र का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके जाने से एक ऐसे युग का अंत हुआ है, जिसने संस्कृत शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

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