कागज और कलम साथ आए तो बनता इतिहास
एनबीडी साहित्य, –डॉ मंजू लोढ़ा, वरिष्ठ कवयित्री खिड़की की मुंडेर पे बैठा,एक कोरा काग़ज़ निहारता है।बाहर की दुनिया रंगीन है,और मैं… बस सफेद सा रह जाता हूं। गाड़ियों की चहल-पहल,बच्चों की किलकारी,पेड़ों का झूमना,और दिलों की भागदौड़… कोई लड़ रहा है, कोई हँस रहा है,कोई प्रेम में डूबा बाहों में बाहें डाले चल रहा है।…
