एनबीडी मुंबई,
मलाड निवासी अस्मिता मिश्रा (26) की संदिग्ध मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने प्रारंभिक जांच में सामने आई कई खामियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मामले में पति अभय मिश्रा अभी तक अरेस्ट नहीं हुआ है । जबकि अस्मिता के ससुर मनीष मिश्रा और देवर जयराज मिश्रा आदि गिरफ्तार हुए थे ।
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है, क्योंकि अब तक की जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है।
दहेज और प्रताड़ना के आरोप
परिजनों के अनुसार, अस्मिता की शादी नवंबर 2021 में मीरा रोड निवासी अभय मिश्रा से हुई थी। शादी के बाद से ही उस पर दहेज के लिए दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि उससे लग्जरी कार और 35 लाख रुपये के हीरों की मांग की जा रही थी, जिसे लेकर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
बताया गया कि 22 फरवरी 2023 को अस्मिता ने अपने पिता को फोन कर मारपीट और तलाक की बात कही थी। इसके दो दिन बाद, 24 फरवरी को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
जांच में खामियों पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने पाया कि पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच में कई विसंगतियां हैं। शव पर चोट के निशान होने के बावजूद रिपोर्ट में उनका समुचित उल्लेख नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जांच एजेंसियों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाया।
परिजनों की मांग पर कार्रवाई
मृतका के पिता अमर मिश्रा ने लगातार सीबीआई जांच की मांग की थी और आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की अपील की थी। उनके वकील एडवोकेट उदय उपाध्याय के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
कोर्ट ने दलीलों से सहमत होते हुए कहा कि मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। इसके बाद केस को सीबीआई के हवाले कर दिया गया।
आरोपियों की गिरफ्तारी
सूत्रों की माने तो इस मामले में पति अभय मिश्रा की पुलिस को अब भी तलाश है , मनीष मिश्रा ससुर, जयराज देवर, प्रेमलता सास,, पायल ननद , और पूर्णिमा भी ननद समेत अन्य पर केस दर्ज है।
