संजय निषाद और बाबा दुबे की मुलाकात से बदली बदलापुर की राजनीति

एनबीडी जौनपुर,

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद का पूर्व विधायक बाबा दुबे से बदलापुर स्थित उनके आवास बाबा कुंज में की गई मुलाकात ने बदलापुर विधानसभा में राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। देखा जाए तो बाबा दुबे ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पिछला चुनाव लड़ा था और बहुत ही कम मतों से पराजित हुए थे। लोकसभा चुनाव में बाबू सिंह कुशवाहा को टिकट दिए जाने से नाराज बाबा दुबे ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ है कि वे किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे? अब तक आठ चुनाव लड़ चुके बाबा दुबे का चुनाव लड़ना तय है और वह बाकायदा जन विश्वास यात्रा के माध्यम से लोगों से लगातार मिल रहे हैं। संजय निषाद की पार्टी, भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाबा दुबे से उनके मिलने का औचित्य क्या है? राजनीतिक जानकारों की माने तो संजय निषाद शाहगंज की सीट के बदले बदलापुर की सीट मांग सकते हैं। शाहगंज विधानसभा में जिस तरह से रमेश सिंह को मामूली मतों से विजय प्राप्त हुई थी, जबकि ओवैसी की पार्टी को 8 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे। 2027 के चुनाव में मुसलमान का यह मत किसी भी कीमत पर बंटता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में रमेश सिंह की विजय पर संदेह के बादल दिखाई दे रहे हैं। शाहगंज के मुकाबले संजय निषाद को बदलापुर की सीट ज्यादा सुरक्षित दिखाई दे रही है।

भाजपा भी भीतर ही भीतर समाजवादी पार्टी के पीडीए प्रयोग से डरती दिखाई दे रही है। आने वाले चुनाव में यूजीसी प्रमुख मुद्दा रहेगा, जिसके चलते भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी बदलापुर विधानसभा में निषाद या अन्य ऐसी जाति के कैंडिडेट को खड़ा कर सकती है, जो भाजपा का वोट बैंक माना जाता रहा है। ऐसे में भाजपा भी इस सीट पर झुकने को तैयार हो सकती है। इस बारे में पूछे जाने पर बाबा दुबे ने कहा कि संजय निषाद उनसे मित्रवत मुलाकात करने आए थे। हम लोगों के बीच कई बातों पर सकारात्मक चर्चा हुई। एक बात तो तय है कि इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलों का बाजार पूरी तरह से गरम दिखाई दे रहा है।

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