वार्ड 43 से विनोद मिश्रा का नामांकन, भाजपा–महायुति शक्ति प्रदर्शन के साथ उतरे मैदान में

एनबीडी मलाड,

मुंबई: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के तहत भाजपा के पूर्व गट नेता एवं पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने सोमवार को वार्ड नंबर 43 (कुरार गांव, मलाड पूर्व) से भाजपा–महायुति उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के अवसर पर भाजपा, शिवसेना और महायुति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे यह कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो गया।

दोपहर को अनमोल हाइट्स (बिल्डिंग नंबर 3) से कुरार पुलिस स्टेशन के पीछे स्थित मनपा निर्वाचन कार्यालय तक पदयात्रा निकाली गई। इस दौरान कामगार नेता एवं भाजपा उपाध्यक्ष अभिजीत राणे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए विनोद मिश्रा ने कहा,

“पिछले दस वर्षों में किए गए विकास कार्यों के साथ मैं जनता के बीच जा रहा हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि वार्ड 43 की जनता मुझे भारी मतों से आशीर्वाद देगी। मैं भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मुझे यह अवसर दिया।”

उन्होंने आगे कहा कि उनके अगले कार्यकाल की प्राथमिकताओं में सड़कों का सुधार, सीवरेज लाइनें, उद्यानों का विकास, अस्पताल और डाकघर की सुविधाओं में सुधार शामिल हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे गट के 25 वर्षों के भ्रष्टाचार को उजागर किया जाएगा।

“16 जनवरी को वार्ड 43 में कमल जरूर खिलेगा,” उन्होंने विश्वास जताया।

विनोद मिश्रा ने बताया कि कुरार में जल्द ही राशनिंग कार्यालय शुरू होगा। अस्पताल के लिए आरक्षण मिल चुका है और उसे शीघ्र चालू कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्वच्छता, ट्रैफिक प्रबंधन और युवाओं को नशामुक्त बनाने के लिए विशेष पहल करने की बात भी कही।

उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में विनोद मिश्रा ने समाज के विभिन्न वर्गों के साथ लगातार बैठकें कर जनसंवाद को मजबूत किया है। उनके प्रमुख कार्यों में एस.के. पाटिल नगर निगम अस्पताल को पुनः शुरू कराना, डायलिसिस सेंटर की स्थापना, अस्पताल आरक्षण सुनिश्चित करना, सीवर लाइनें बिछाना, पोस्ट ऑफिस खुलवाना, महानगर गैस पाइपलाइन कनेक्शन दिलाना तथा मलाड ईस्ट में नए पी/ईस्ट बीएमसी वार्ड कार्यालय की स्थापना में अहम भूमिका शामिल है।

भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा के रूप में पहचाने जाने वाले विनोद मिश्रा ने उद्धव ठाकरे सरकार के दौरान बीएमसी के कई टेंडरों में अनियमितताओं को उजागर किया था, जिसके परिणामस्वरूप 5,400 करोड़ रुपये के टेंडर रद्द किए गए।

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