एनबीडी जौनपुर ,
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सुशासन के तमाम दावों के बावजूद ग्रामीण सड़कों की हालत खस्ताहाल है। सड़क ठेकेदार ही योगी सरकार के पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की लुटिया डुबोने में लगे हैं । जनपद में एक भी ग्रामीण सड़क ऐसी नहीं है, जो पूरे मानक के अनुरूप बनी हो। अधिकांश सड़कें तो ऐसी हैं, जो बनने के एक साल बाद ही शहीद हो गईं। पहले भी सड़के बना करती थी, परंतु आज की तरह इतनी खराब सड़कें कभी नहीं बनी। पुराने ठेकेदारों को डस्टबिन में डाल दिया गया है जबकि नए रंग रूट ठेकेदारों को अधिक से अधिक ठेका दिया जा रहा है। सड़कों में व्याप्त भ्रष्टाचार का मूल्यांकन इसी बात से लगा सकते हैं कि सड़के जितनी बदहाल हो रही हैं, ठेकेदार उतने ही मालामाल हो रहे हैं।

ठेकेदारों की किस्मत चमक रही है और सड़कों की किस्मत अंधकारमय हो रही है। जिन सड़कों के निर्माण में 40 से 50 प्रतिशत तक कमीशन खाया जाए, उनकी दयनीय हालत का अंदाजा आप आसानी से लगा सकते हैं। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि इन ठेकेदारों पर स्थानीय विधायकों के विरोध का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यही कारण है कि विधायक भी इस मामले को लेकर असहाय और निर्बल नजर आ रहे हैं। साफ है कि इन ठेकेदारों पर बड़े स्तर के नेताओं या प्रशासकीय लोगों का वरदहस्त है। खराब सड़कों का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि इससे अच्छा तो कच्ची सड़कें ही थी।
कम से कम उनके ऊपर फिसलने वाली गिट्टियां तो नहीं थी। कुछ पुराने ठेकेदारों ने बताया कि अब ठेकेदारी एक वर्ग विशेष तक सीमित रह गई है। हम लोग तो दाल में नमक जैसा लाभ लेते थे परंतु आज के ठेकेदार नमक छोड़कर बाकी सब कुछ हजम कर जाते हैं। सैया भए कोतवाल, अब डर काहे का गीत गुनगुना रहे, इन बेलगाम सड़क के ठेकेदारों पर लगाम कौन लगाए?
