स्वर्ग से भी बड़ा होता है मां का स्थान : पंडित धर्मराज तिवारी

एनबीडी जौनपुर,

मां प्रत्यक्ष ईश्वर होती है, जो न सिर्फ हमें पैदा करती है अपितु हमारा पालन पोषण करती है और हमारी बुराइयों को नष्ट करने का काम करती है। यही कारण है कि मां का स्थान स्वर्ग से बड़ा माना गया है। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित घनश्यामपुर में प्रमोद कुमार तिवारी के यहां आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास से बोलते हुए प्रख्यात पंडित धर्मराज तिवारी ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि माँ का महत्व हमारे जीवन में सांसों की तरह है; वह पहली गुरु, निस्वार्थ प्रेम की मूरत और भावनात्मक सहारा होती हैं।

वे निस्वार्थ भाव से पालन-पोषण, शिक्षा और संस्कार देती हैं, जो हमें जीवन की चुनौतियों से लड़ने और एक बेहतर इंसान बनने के लिए सक्षम बनाते हैं। माँ के बिना जीवन अधूरा और स्नेहविहीन होता है। 5 मार्च से प्रारंभ कथा का समापन 11 मार्च को होगा। 12 मार्च को हवन महाप्रसाद का आयोजन किया गया है। कथा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। मुख्य यजमान के रूप में प्रमोद कुमार तिवारी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती तारा देवी प्रतिदिन पूजा अर्चना और आरती कर रहे हैं। परिवार की तरफ से अशोक कुमार तिवारी और अजय कुमार तिवारी आए हुए लोगों का स्वागत सम्मान कर रहे हैं। आज की कथा में उपस्थित प्रमुख लोगों में कमला प्रसाद तिवारी बड़े बाबू, डॉ ओमप्रकाश तिवारी, रामकृष्ण दुबे, पूर्व प्रधान रामजियावन तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, पूर्व प्रधानाचार्य रमेश सिंह, प्रधानाचार्य डॉ विनोद मिश्र ,वीरेंद्र सिंह, रामसागर सिंह,राजेंद्र तिवारी, गोरखनाथ गुप्ता, सुरेश चंद तिवारी, पारसनाथ गुप्ता, शिवपूजन बरनवाल, हरिओम बरनवाल, अच्छेलाल मिश्र, शंभू नाथ मिश्र, दुर्गेश श्रीवास्तव आदि का समावेश रहा।

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