एनबीडी जौनपुर,
पुस्तकें ज्ञान का अक्षय भंडार और मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं, जो हमें जीवन भर मार्गदर्शन, शिक्षा और मानसिक सुकून प्रदान करती हैं। ये हमारे व्यक्तित्व को निखारती हैं, रचनात्मकता बढ़ाती हैं, तनाव कम करती हैं और इतिहास व संस्कृतियों से परिचित कराती हैं। पुस्तकें सही-गलत का अंतर सिखाकर हमें बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करती हैं। जनपद के सिकरारा थाना अंतर्गत स्थित सतलपुर गांव में शैल साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह प्रिंसू ने उपरोक्त बातें कही। कार्यक्रम में देश की प्रख्यात साहित्यकार और लेखिका किरण तिवारी की दो पुस्तकों अंतर्द्वंद्व एवं काव्यकिरण का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य सुधाकर उपाध्याय ने किया।
ब्लॉक प्रमुख सिकरारा संजय सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अमित सिंह तथा डॉ संतोष सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मानित अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत लल्लन उपाध्याय भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सुंदर संचालन पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष सुशील उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम के आयोजक रवि प्रकाश मिश्र ने सभी अतिथियों का शॉल और स्मृति चिन्ह से सम्मान किया। किरण तिवारी ने कहा कि आमतौर पर पुस्तक लोकार्पण का कार्यक्रम बड़े शहरों में किया जाता है, परंतु ग्रामीण अंचल में जिस तरह से इस कार्यक्रम को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला, उसे देखकर मैं गौरव की अनुभूति कर रही हूं।
शैल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था शैल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था की संस्थापक अध्यक्ष किरण तिवारी ने बताया कि विगत दिनों इस संस्था की स्थापना की गई है। संस्था का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति, कला एवं भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार हेतु कार्य करने के साथ-साथ हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य—कविता, कहानी, निबंध, नाटक आदि को प्रोत्साहित करना तथा नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह संस्था साहित्यिक गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों, सेमिनारों, कार्यशालाओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने के साथ-साथ लोक-संस्कृति, लोक-कला, लोक-साहित्य एवं पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण हेतु कार्यक्रम संचालित करेगी और युवा पीढ़ी में साहित्यिक चेतना, रचनात्मक सोच और सांस्कृतिक समझ विकसित करने के साथ-साथ यह संस्था महिला रचनाकारों, ग्रामीण प्रतिभाओं एवं वंचित वर्गों की साहित्यिक व सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन देने का काम करेगी।
