लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम पर अध्ययन रिपोर्ट का विमोचन

मुंबई,। देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय सुलभ रूप से उपलब्ध हो, न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में कमी आए तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण विधिक सहायता सहजता से प्राप्त हो, इस उद्देश्य से ‘दर्द से हमदर्द तक (DSHT)’ तथा ‘सुप्रा लीगल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘जस्टिस फॉरवर्ड 2026 स्ट्रेंथनिंग लीगल एड, एम्पॉवरिंग फ्यूचर एडवोकेट्स’ विषयक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से विधिक सहायता व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाने के साथ-साथ नवोदित अधिवक्ताओं में समाजोन्मुख दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर ‘असेसमेंट स्टडी ऑफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम’ शीर्षक महत्वपूर्ण अध्ययन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इस रिपोर्ट में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम की वर्तमान स्थिति, न्यायालयों में लंबित मामलों के कारणों, विधिक सहायता व्यवस्था के समक्ष विद्यमान चुनौतियों तथा उसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक उपायों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल अधिवक्ता प्रवीण फलदेसाई, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अधिवक्ता अनिल सिंह तथा ‘दर्द से हमदर्द तक (DSHT)’ के संस्थापक अधिवक्ता प्रकाश सालसिंगीकर उपस्थित थे। कार्यक्रम में विधि क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों तथा नवोदित अधिवक्ताओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, “‘दर्द से हमदर्द तक’ संस्था निःस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने का अत्यंत सराहनीय कार्य कर रही है। न्याय व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने में ऐसे प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान है। आज यहां उपस्थित युवा विधि विद्यार्थियों एवं नवोदित अधिवक्ताओं को देशबंधु सीआर दास जैसे महान विधिवेत्ता एवं स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के नेतृत्व में न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, गतिशील एवं आमजन के लिए सुलभ बनाने हेतु संचालित विभिन्न पहलों की सराहना की। ‘दर्द से हमदर्द तक (DSHT)’ संस्था पिछले कई वर्षों से समाज के वंचित एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा विभिन्न कारणों से वर्षों से कारागारों में निरुद्ध बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। संस्था पात्र अधिवक्ताओं के माध्यम से बंदियों को विधिक प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराकर उन्हें न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयाकार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के लिए शासन, न्यायपालिका, विधि विशेषज्ञों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा युवा अधिवक्ताओं के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने के लिए विधिक सहायता व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता भी व्यक्त की गई।

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