मेहनत की कमाई से खरीदे गए सोने में कलयुग का वास नहीं होता : धर्मराज महाराज

जौनपुर। जनपद के सिगरामऊ क्षेत्र के डंडारी ग्राम पंचायत में मुख्य यजमान वंशगोपाल दादा के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस परम पूज्य कथा व्यास धर्मराज महाराज ने श्रद्धालुओं को भागवत महात्म्य का रसपान कराया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से प्रेत योनि से भी मुक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने भगवान के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान सत्य, चित और आनंद स्वरूप हैं। कथा व्यास ने भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि जिस प्रकार तोता केवल मीठे और पके फलों पर ही अपनी चोंच मारता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत कथा भी आम के पके फल के समान मधुर एवं कल्याणकारी है। उन्होंने ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धुंधकारी को भागवत श्रवण से प्राप्त मोक्ष की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
प्रथम दिवस की कथा में धर्मराज महाराज ने कलियुग के आगमन, राजा परीक्षित द्वारा कलियुग को रहने के लिए स्थान प्रदान किए जाने तथा अंततः कलियुग के राजा परीक्षित के मुकुट में प्रवेश करने की प्रसंग का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित द्वारा धारण किया गया स्वर्ण मुकुट परिश्रम की कमाई से प्राप्त नहीं था, बल्कि युद्ध में विजय के उपरांत प्राप्त हुआ था। इसी कारण कलियुग उसमें प्रवेश कर सका। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि मेहनत की कमाई से खरीदे गए सोने में कलियुग का वास नहीं होता।धर्मराज महाराज के ओजस्वी एवं अमृतमयी प्रवचनों से उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरे पांडाल में भक्तिमय वातावरण बना रहा। इस अवसर पर प्रमुख रूप से राजकुमार उपाध्याय, धीरज, टिंकू, ऋतिक, आदर्श, उत्कर्ष, राहुल श्रीवास्तव, प्रदीप विश्वकर्मा, आशीष मिश्र, विमल मिश्र, रामजी पाठक, देवता मिश्र, शिवाजी शुक्ला, संतोष शुक्ला, हृदय नारायण, राकेश प्रसाद मिश्र, प्रेम सागर मिश्र, राम पूजन , मुन्ना मिश्रा, वरिष्ठ समाजसेवी रामजी उपाध्याय, कल्लू सिंह, सत्यदेव सिंह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु एवं कथा प्रेमी उपस्थित रहे। 29 जून की शाम 4 बजे से शाम 7 बजे तक आरंभ कथा का समापन 5 जुलाई को होगा। 6 जुलाई को महाप्रसाद (भंडारा )का आयोजन किया गया है।

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